Raman Singh file image
आज के इस अंक में हम बात करेंगे कि छत्तीसगढ़ के पिछले विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी किन कारणों से हारी थी और इस बार उसके चुनाव जीतने की कितनी संभावना है।
दोस्तों सबसे पहले तो मैं आपको यह बता दूं कि छत्तीसगढ़ में अभी भी भारतीय जनता पार्टी के जीतने की बहुत कम उम्मीद है क्योंकि वहां के जो मौजूदा मुख्यमंत्री हैं भूपेंद्र सिंह बघेल उनके कार्यकलापों से जनता काफी खुश है और भारतीय जनता पार्टी को सेंध लगाने के लिए छत्तीसगढ़ में बहुत कम मौके हैं या यह कहूं कि ना के बराबर मौका है।
इस अंक में हम भाजपा के 2018 में हुए चुनाव के हार के कारणों की समीक्षा करेंगे।
छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में भाजपा का हारना ही एक बहुत बड़ी गलती थी। भाजपा के हार का कांग्रेस ने बखूबी फायदा उठाया और छत्तीसगढ़ को काफी अच्छे से चलाने में भूपेंद्र सिंह बघेल सफल हुए हैं।
2018 में जीएसटी और तमाम तरह के अलग मुद्दों के होने के बावजूद भी भाजपा आसानी से छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव जीत सकती थी लेकिन कुछ कारणों की वजह से भारतीय जनता पार्टी चुनाव हार गई।
2018 में भारतीय जनता पार्टी के चुनाव हारने का सबसे पहला कारण था मुख्यमंत्री रमन सिंह को लेकर anti-incumbency। आपको बता दें कि रमन सिंह 2003 से लेकर 2018 तक लगातार छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रहे।
छत्तीसगढ़ के जनता में उनको लेकर जितनी anti-incumbency नहीं थी उससे ज्यादा anti-incumbency भारतीय जनता पार्टी के अंदर थी। भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ताओं की पार्टी है और इसमें एक समय तक लंबे चेहरे के साथ आप नहीं रह सकते।
आपको बता दें कि मुख्यमंत्री रमन सिंह को यह भरोसा था कि जनता उन्हें पसंद करती है और यह सच भी है। समय के साथ रमन सिंह को अपना दायित्व बदलना चाहिए था।
उन्हें पार्टी के किसी और कार्यकर्ताओं को मौका देना चाहिए था। क्योंकि anti-incumbency को सबसे ज्यादा पार्टी के अंदर मैनेज करना जरूरी है उसके बाद में बाहर मैनेज करना जरूरी है।
तो पार्टी के अंदरूनी लड़ाई के वजह से भी रमन सिंह चुनाव हार गए।
इसके अलावा जो दूसरा मुद्दा था वह था नौकरियों का मुद्दा । छत्तीसगढ़ भारतीय जनता पार्टी सरकार का 2013 से 2018 का जो कार्यकाल था उस में सरकारी नौकरियों का आउटसोर्सिंग करना शुरू हो गया था।
छत्तीसगढ़ ही क्या भारत के लोगों में सरकारी नौकरी को लेकर एक अलग ही क्रेज रहता है। जब नौकरियों का प्राइवेटाइजेशन होता है तो उनको इस बात बुरी लगती है। छत्तीसगढ़ में नौकरियों का आउटसोर्सिंग शुरू हुआ है तो लोगों को लगा कि सरकार सरकारी नौकरी नहीं दे रही है और यह मामला छत्तीसगढ़ के सरकार के खिलाफ चला गया।
हालांकि अगर हम आउटसोर्सिंग भी करते हैं तो सरकारी आंकड़ों के हिसाब से एंप्लॉयमेंट में कोई कमी नहीं आती। लेकिन भारत में लोगों को यह पसंद नहीं है और भारतीय जनता पार्टी के छत्तीसगढ़ में चुनाव हारने का एक मुख्य कारण था।
इसके अलावा हार का एक और भी बड़ा कारण था। छत्तीसगढ़ के जशपुर में शुरू हुए पत्थलगड़ी आंदोलन। इस आंदोलन को ठीक से मैनेज करने में भारतीय जनता पार्टी की सरकार विफल रही।
इस आंदोलन का सीधा फायदा कांग्रेस को हुआ। यह आंदोलन झारखंड में शुरू हुआ था और धीरे-धीरे इसने छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और उड़ीसा के आदिवासी इलाकों में अपना स्थान बना लिया।
पत्थलगड़ी आंदोलन पर हम कभी विस्तार से चर्चा करेंगे क्योंकि यह एक बहुत ही बड़ा आंदोलन है जो आदिवासियों समुदाय के अधिकारों की बात करता है। और इसका तथ्यात्मक विश्लेषण कम शब्दों में नहीं किया जा सकता है।
लोगों का और कार्यकर्ताओं का यह कहना था कि 2018 विधानसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी ना लड़कर छत्तीसगढ़ की सरकार लड़ रही थी।
चुनाव में कार्यकर्ताओं से ज़्यादा एजेंसियों को चुनाव प्रचार में लगा दिया गया था। जिसका सीधा असर यह हुआ कि कार्यकर्ता नाराज हो गए। उन्होंने खुद को उपेक्षित महसूस किया।
भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ताओं की पार्टी है और जब कार्यकर्ता ही सुदृढ़ ही नहीं था तो हार के का एक कारण यह भी बना।
इसके अलावा आदिवासियों को पुलिस के द्वारा प्रताड़ित किया जाना भी हार का एक मुख्य कारण था। इस अंक में हमने जब पहले पत्थलगड़ी की घटना की चर्चा की थी। उसी दौरान पुलिस द्वारा कई गलत कदम उठाए गए जिसके लिए सरकार को सीधे तौर पर दोषी माना गया। एक बहुत बड़ा वर्ग सरकार से नाराज हो गया और उसने सरकार के खिलाफ वोट दिया और यह भी भारतीय जनता पार्टी के हार का कारण बना।
अगर भाजपा को यह चुनाव जीतना है तो उसे आदिवासी समुदाय से आने वाले किसी नेता को अपने साथ में लाना होगा।
दोस्तों आज के इस अंक में इतना ही। आगे हम इस बार चुनाव को लेकर हर एक विधानसभा पर बात करेंगे।
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